यूपी सरकारी सेवाओं की आपकी गाइड

भूलेख (भूमि रिकॉर्ड)

UP Bhulekh (भूलेख उत्तर प्रदेश) — खतौनी, खसरा, भू-नक्शा और भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन 2026

UP Bhulekh खतौनी ऑनलाइन देखें — Real Time खतौनी, खसरा, भू-नक्शा, वाद ग्रस्त स्थिति, विक्रय स्थिति, नामांतरण। 2 करोड़+ भूखंड, 2.6 करोड़ users। upbhulekh.gov.in

अपडेट:

फसली वर्ष बदलें ↓

1खतौनी देखें

upbhulekh.gov.in → “भूलेख सेवाएं” → “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नक़ल देखें” → जनपद → तहसील → ग्राम → गाटा, खाता, नाम, भूमि श्रेणी या नामांतरण दिनांक से खोजें → देखें/डाउनलोड करें।

2रियल टाइम खतौनी

upbhulekh.gov.in → “Real Time खतौनी की नकल देखें” → बाकी चरण वही।

3भू-नक्शा (ज़मीन का नक्शा)

upbhunaksha.gov.in → जनपद → तहसील → ग्राम → खसरा संख्या → नक्शे पर भूखंड देखें।

4वाद ग्रस्त (विवाद की जाँच)

upbhulekh.gov.in → “भूखंड वादग्रस्त स्थिति” → जनपद → तहसील → ग्राम → खसरा → जाँचें।

UP Bhulekh क्या है

भूलेख, यानी “भू” (भूमि) और “लेख” (रिकॉर्ड), उत्तर प्रदेश का आधिकारिक डिजिटल भूमि रिकॉर्ड पोर्टल है, जो upbhulekh.gov.in पर है। इसे राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के साथ मिलकर चलाती है। यह राज्य का हर भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन लाता है: खतौनी (मालिकाना हक का रिकॉर्ड), खसरा (भूखंड का ब्योरा), भू-नक्शा (नक्शा), नामांतरण की स्थिति, विवाद की स्थिति और बिक्री का इतिहास।

UP Bhulekh पोर्टल (राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश) का होमपेज, जिसमें भूलेख सेवाएं और Login मेन्यू हाइलाइट हैं
upbhulekh.gov.in का होमपेज। खतौनी, प्रमाणित नकल, विक्रय की स्थिति और वाद ग्रस्त स्थिति की सेवाएं "भूलेख सेवाएं" में हैं; लॉगिन "Login" में हैं।

यह पोर्टल 2 मई 2016 को डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत शुरू हुआ। उससे पहले अपनी ज़मीन का रिकॉर्ड देखने के लिए तहसील जाना, लाइन में लगना और गांव के लेखपाल पर निर्भर रहना पड़ता था, जो हाथ से बही-खाते (भौतिक रजिस्टर) रखता था। रिकॉर्ड कभी-कभी गलत होते थे और धोखाधड़ी पकड़ना मुश्किल था। आज सभी 75 जिलों और 358 तहसीलों के 2 करोड़ से ज़्यादा भूखंड डिजिटल हैं, और 2025-26 तक 95% कृषि भूमि रिकॉर्ड कंप्यूटरीकृत हो चुके हैं। इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है: रजिस्टर्ड यूज़र 1.8 करोड़ (2023) से 2.1 करोड़ (2024) और 2.6 करोड़ (2025) हो गए, और ऑनलाइन खसरा डाउनलोड अकेले 2025 में 12.5 करोड़ पार कर गए (स्रोत: राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम 2024-25)।

पोर्टल की सभी 9 सेवाएं

# सेवा क्या करती है
1 खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल मालिकाना हक का रिकॉर्ड (अधिकार अभिलेख) देखें, मुख्य सेवा
2 Real Time खतौनी की नकल ताज़ा नामांतरण दिखाने वाला लाइव रिकॉर्ड
3 राजस्व ग्राम खतौनी का कोड / भूखंड Unique Code 6 अंकों का राजस्व ग्राम कोड (जनगणना 2011 + राजस्व अपडेट) और भूखंड का यूनिक कोड, जो कानूनी दस्तावेज़ों और सरकारी पत्राचार में काम आता है
4 भूखंड/गाटे के विक्रय की स्थिति भूखंड की IGRSUP से बिक्री रजिस्ट्री हुई है या नहीं
5 भूखंड/गाटे के वादग्रस्त होने की स्थिति भूखंड पर राजस्व अदालत में विवाद है या नहीं
6 खतौनी अंश-निर्धारण की नकल अंश-निर्धारण: सह-मालिकों में हिस्सा कैसे बंटा है
7 राजस्व ग्राम सार्वजनिक सम्पत्ति गांव की सार्वजनिक संपत्ति (तालाब, चरागाह, रास्ते) का रिकॉर्ड
8 निष्क्रांत संपत्ति निष्क्रांत संपत्ति: बंटवारे के समय पलायन करने वालों की छोड़ी गई ज़मीन
9 Real Time खतौनी Dashboard रियल टाइम नामांतरण गतिविधि का डैशबोर्ड

सभी नौ सेवाएं बिना लॉगिन मुफ्त देखी जा सकती हैं। प्रमाणित नकल (सत्यापन कोड के साथ कानूनी रूप से मान्य), नामांतरण आवेदन और शिकायत के लिए पोर्टल पर रजिस्टर्ड लॉगिन चाहिए।

खतौनी ऑनलाइन कैसे देखें — स्टेप बाय स्टेप

खतौनी, जिसे आधिकारिक तौर पर “अधिकार अभिलेख” कहते हैं, मालिकाना हक का मुख्य दस्तावेज़ है। इसमें किसी व्यक्ति के एक गांव के सभी भूखंड दर्ज होते हैं, हर भूखंड के क्षेत्रफल, हिस्से (अंश) और कानूनी अधिकारों के साथ।

  1. पोर्टल खोलें

    किसी भी ब्राउज़र में upbhulekh.gov.in खोलें। मोबाइल पर Chrome सबसे अच्छा चलता है।

  2. खतौनी की नकल खोलें

    “भूलेख सेवाएं” पर क्लिक करें और “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नक़ल देखें” चुनें।

    भूलेख सेवाएं मेन्यू खुला है, जिसमें चार विकल्प हैं: खतौनी की नकल देखें, ऑनलाइन भुगतान से प्रमाणित प्रति, विक्रय की स्थिति और वाद ग्रस्त स्थिति
    "भूलेख सेवाएं" मेन्यू में चार विकल्प हैं: खतौनी की नकल देखना, ऑनलाइन भुगतान से प्रमाणित प्रति लेना, भूखंड के विक्रय की स्थिति, और भूखंड के वाद ग्रस्त होने की स्थिति।
  3. कैप्चा भरें

    अगर कैप्चा कोड दिखे तो उसे लिखें। पढ़ने में मुश्किल हो तो बगल के रिफ्रेश आइकन पर क्लिक करके साफ कैप्चा लें।

  4. जनपद चुनें

    सूची से अपना जनपद (जिला) चुनें, या “Search District” में उसका नाम लिखें। UP के सभी 75 जिले सूची में हैं, अंग्रेज़ी में और साथ में हिंदी नाम के साथ।

    भूलेख पर जनपद चुनने की सूची, Search District बॉक्स के साथ, जिसमें अमरोहा, अमेठी, अम्बेडकर नगर, अयोध्या और अलीगढ़ दिख रहे हैं
    चरण 4: जनपद चुनें। सर्च बॉक्स में लिखने से सूची छोटी हो जाती है।
  5. तहसील चुनें

    अपनी तहसील चुनें। सूची में सिर्फ चुने गए जनपद की तहसीलें दिखती हैं।

    एटा जनपद चुनने के बाद भूलेख पर तहसील की सूची, जिसमें अलीगंज, एटा और जलेसर तहसीलें हैं
    चरण 5: जनपद (यहां एटा) के बाद तहसील चुनें।
  6. ग्राम चुनें

    अपना ग्राम (गांव) नाम से या ग्राम कोड से चुनें, या उसके नाम का पहला हिंदी अक्षर चुनें। आपका गांव न दिखे तो देखें कि तहसील सही चुनी है, क्योंकि 2020 से 2024 के बीच कई जिलों में तहसीलों की सीमाएं बदली गईं।

    भूलेख पर जनपद, तहसील और ग्राम के कॉलम, एटा और एटा चुने हुए, और गांवों की सूची जिसमें हर गांव का कोड है
    चरण 6: जनपद और तहसील चुनने के बाद ग्राम का नाम / कोड चुनें। हर गांव के साथ उसका 6 अंकों का ग्राम कोड दिखता है।
  7. खोजने का तरीका चुनें

    ऊपर “वर्तमान खतौनी/पुरानी फसली वर्ष” बॉक्स से आप मौजूदा खतौनी या किसी पुराने फसली वर्ष की खतौनी चुन सकते हैं। उसके नीचे खोज के पांच टैब हैं:

    खोज का टैब कब इस्तेमाल करें
    खसरा/गाटा संख्या द्वारा खोजें आपको अपने भूखंड का नंबर पता है। सबसे सटीक तरीका।
    खाता संख्या द्वारा खोजें आपको खाता नंबर पता है। उस खाते के सभी भूखंड दिखते हैं।
    खातेदार के नाम द्वारा खोजें आपको मालिक का नाम पता है। नाम के शुरुआती कुछ अक्षर हिंदी में लिखें।
    भूमि श्रेणी द्वारा खोजें राजस्व रिकॉर्ड में ज़मीन की श्रेणी से खोजें।
    नामांतरण दिनांक से खोजें नामांतरण की तारीख से खोजें।

    ज़्यादातर गाइड सिर्फ पहले तीन तरीके बताती हैं। आखिरी दो तब काम आते हैं जब आपके पास भूखंड या खाता संख्या न हो: अगर ज़मीन की श्रेणी पता है (जैसे 1-क) तो भूमि श्रेणी से खोजें, और अगर मोटे तौर पर पता है कि ज़मीन कब किसी और के नाम हुई, जैसे बिक्री या वरासत के बाद, तो नामांतरण दिनांक से खोजें।

    भूलेख खोज पेज, जिसमें जनपद, तहसील, ग्राम और फसली वर्ष चुनने के बॉक्स और खोज के पांच टैब हैं, खातेदार के नाम वाला टैब चुना हुआ
    चरण 7: खोज के पांच टैब, यहां खातेदार के नाम द्वारा खोजें चुना हुआ है। दाईं ओर के बॉक्स से मौजूदा खतौनी या पुराना फसली वर्ष चुनते हैं।
  8. खोजें और भूखंड चुनें

    मान डालें और “खोजें” पर क्लिक करें। नतीजों में मेल खाने वाला हर भूखंड अपने यूनिक कोड और क्षेत्रफल के साथ दिखता है। अगर भूखंड बंट चुका है, तो उसके हिस्से अलग-अलग दिखते हैं (जैसे 414अ और 414ब)। जो भूखंड चाहिए उसे चुनें और “उद्धरण देखें” पर क्लिक करें।

    भूलेख पर गाटा 414 की खोज के दो नतीजे, 414ब और 414अ, हर एक 16 अंकों के यूनिक कोड और हेक्टेयर में क्षेत्रफल के साथ
    चरण 8: गाटा 414 की खोज में दो हिस्से मिलते हैं, 414ब और 414अ, हर एक अपने 16 अंकों के यूनीक कोड और हेक्टेयर में क्षेत्रफल के साथ।
  9. खतौनी पढ़ें

    खतौनी में मालिक का नाम, पिता का नाम, उस खाते की सभी खसरा/गाटा संख्याएं, हर भूखंड का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में, और जहां दिखाया गया हो वहां बीघा-बिस्वा में), हिस्से का प्रतिशत, भूमि की श्रेणी और दर्ज कोई आदेश या टिप्पणी दिखती है। लाल रंग में दिखी खसरा संख्याओं पर क्लिक करके उस भूखंड की स्थिति खुलती है: वाद ग्रस्त, विक्रय, भू-नक्शा और नामांतरण बही।

    भूलेख खतौनी की तालिका, जिसमें मालिक का ब्योरा, क्षेत्रफल और हिस्से के कॉलम हैं; लाल गाटा संख्या 414ब अपने यूनिक कोड के साथ, और भूखंड की स्थिति के लिए खसरा संख्या पर क्लिक करने का टूलटिप। मालिकों के नाम धुंधले किए गए हैं।
    चरण 9: खतौनी (मालिकों के नाम धुंधले किए गए हैं)। टूलटिप बताता है कि भूखंड की वाद ग्रस्त, विक्रय, नक्शा या नामांतरण की स्थिति देखने के लिए लाल खसरा संख्या पर क्लिक करें। श्रेणी वाली पंक्ति में 1-क लिखा है: भूमि जो संक्रमणीय भूमिधरों के अधिकार में हो।
  10. देखें, डाउनलोड या प्रिंट करें

    रिकॉर्ड “उद्धरण खतौनी (अप्रमाणित प्रति)” के रूप में खुलता है, यानी बिना प्रमाणन वाला उद्धरण। इसके ऊपर जनपद, तहसील, ग्राम, ग्राम कोड, फसली वर्ष और खाता संख्या दिखती है। ब्राउज़र के प्रिंट फ़ंक्शन से डाउनलोड या प्रिंट करें (डेस्कटॉप पर Ctrl+P, मोबाइल पर Share → Print)।

    उद्धरण खतौनी (अप्रमाणित प्रति) का ऊपरी भाग, जिसमें जनपद प्रयागराज, तहसील सदर, ग्राम कोड, फसली वर्ष 1425-1430 और खाता संख्या दिख रही है
    चरण 10: उद्धरण के ऊपर उद्धरण खतौनी (अप्रमाणित प्रति) लिखा होता है, यानी बिना प्रमाणन वाली नकल। यह नकल फसली वर्ष 1425-1430 (1 जुलाई 2017 से 30 जून 2023) की है।

रियल टाइम खतौनी — क्या अलग है और कैसे देखें

पोर्टल पर दो तरह की खतौनी मिलती है। दोनों का फर्क समझने से भ्रम नहीं होता और तहसील के चक्कर बचते हैं।

सामान्य खतौनी (अधिकार अभिलेख) फसली वर्ष के चक्र पर अपडेट होती है। फसली वर्ष UP के भूमि रिकॉर्ड में इस्तेमाल होने वाला राजस्व कैलेंडर है। यह 1 जुलाई से 30 जून तक चलता है, खरीफ और रबी की फसलों के मौसम के साथ, जनवरी-दिसंबर वाले कैलेंडर के हिसाब से नहीं। फसली वर्ष 1433 जुलाई 2025 से जून 2026 तक था, इसलिए अभी फसली वर्ष 1434 (जुलाई 2026 से जून 2027) चल रहा है। सामान्य खतौनी में नामांतरण फसली वर्ष बंद होने पर ही दर्ज होते हैं, इसलिए साल के बीच मंज़ूर हुआ नामांतरण अगले चक्र तक यहां नहीं दिखेगा।

फसली वर्ष कन्वर्टर

फसली वर्ष 1 जुलाई से 30 जून तक चलता है। किसी भी तारीख का फसली वर्ष जानें, या खतौनी पर लिखे फसली वर्ष को अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीखों में बदलें।

तारीख से फसली वर्ष
फसली वर्ष से अंग्रेज़ी तारीखें

यह 1 जुलाई से 30 जून वाले फसली वर्ष पर आधारित एक गाइड है। आपकी खतौनी पर छपा फसली वर्ष ही मान्य है।

रियल टाइम खतौनी लाइव अपडेट होती है। जैसे ही तहसीलदार या SDM नामांतरण (दाखिल खारिज) मंज़ूर करते हैं, रिकॉर्ड में नया मालिक दिखने लगता है। किसी भी भूखंड की सबसे ताज़ा स्थिति इसी में दिखती है।

कैसे देखें: upbhulekh.gov.in → “Real Time खतौनी की नकल देखें” → जनपद, तहसील, गांव और खोज के वही चरण जो सामान्य खतौनी में हैं।

दोनों में भूखंड की स्थिति: लाल रंग में दिखी खसरा संख्या पर क्लिक किया जा सकता है। क्लिक करने पर उस भूखंड की स्थिति खुलती है, जिसमें वाद ग्रस्त (विवाद), विक्रय, नक्शा और नामांतरण बही शामिल हैं। भूखंड पर राजस्व अदालत में मुकदमा हो तो यहीं दिखता है।

पहलू सामान्य खतौनी रियल टाइम खतौनी
अपडेट फसली वर्ष चक्र (सालाना) लाइव, नामांतरण मंज़ूर होते ही
नया मालिक कब दिखता है फसली वर्ष खत्म होने के बाद तहसीलदार/SDM के आदेश के तुरंत बाद
विवाद की स्थिति दिखती है हां: लाल खसरा संख्या पर क्लिक करें हां: लाल खसरा संख्या पर क्लिक करें
किसके लिए सबसे अच्छी अदालत, बैंक लोन (प्रमाणित नकल के साथ) मालिकाना हक की जल्दी जाँच, खरीद से पहले पड़ताल
कानूनी वज़न ज़्यादा (तहसील की प्रमाणित नकल के साथ) सिर्फ जानकारी: ताज़ा डेटा, पर प्रमाणित नहीं

शब्दावली — खतौनी, खसरा, खाता और गाटा में अंतर

ये शब्द लगभग सबको उलझाते हैं। हर एक का मतलब यह है:

खतौनी

मालिकाना हक का रिकॉर्ड। इसमें एक व्यक्ति (या परिवार) के एक गांव के सभी भूखंड दर्ज होते हैं, जैसे आपकी ज़मीन का “खाता विवरण”। लोग जब “ज़मीन का रिकॉर्ड देखो” कहते हैं तो इसी दस्तावेज़ की बात करते हैं।

खसरा

भूखंड-स्तर का रजिस्टर। गांव के हर भूखंड की एक प्रविष्टि होती है, जिसमें क्षेत्रफल, मिट्टी का प्रकार, मौजूदा फसल और मालिक दर्ज होते हैं, जैसे भूखंड का “पहचान पत्र”। फसली (मौसमी) फसल रिकॉर्ड की खसरा नकल ekhasra.up.gov.in पर मिलती है।

खाता

खाता संख्या। यह एक मालिक के सभी खसरा भूखंडों को एक साथ जोड़ती है। एक खाते में कई खसरा/गाटा प्रविष्टियां हो सकती हैं।

गाटा संख्या

भूखंड का नंबर: हर भूखंड की अलग संख्या, जिसे भूलेख पर भूखंड से खोजते समय डालते हैं। बोलचाल में “खसरा नंबर” और “गाटा नंबर” एक ही अर्थ में इस्तेमाल होते हैं, हालांकि राजस्व व्यवस्था में दोनों के काम थोड़े अलग हैं।

भू-नक्शा

नक्शा: भूखंडों की सीमाएं, आकार और स्थिति, जो अलग पोर्टल upbhunaksha.gov.in पर है। भूलेख लिखित रिकॉर्ड देता है, भू-नक्शा नक्शा।

ज़मीन खरीदने से पहले — 5 जाँच जो हर खरीदार को करनी चाहिए

UP में किसी भी ज़मीन के लिए एक रुपया देने से पहले ये पांचों जाँच करें। हर जाँच एक अलग जोखिम पकड़ती है।

1मालिकाना हक (सामान्य खतौनी)

जाँचें कि अभी ज़मीन का मालिक कौन है। विक्रेता का नाम खतौनी से मेल खाना चाहिए। अगर विक्रेता वारिस है पर खतौनी में अब भी मृत मालिक का नाम है, तो वरासत का नामांतरण पूरा नहीं हुआ है, और उसके बिना बिक्री कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ सकती।

2ताज़ा नामांतरण (रियल टाइम खतौनी)

रियल टाइम खतौनी में फसली वर्ष की कटऑफ के बाद मंज़ूर हुए नामांतरण दिखते हैं। विक्रेता आपको ऐसी सामान्य खतौनी दिखा सकता है जिसमें अब भी उसका नाम है, जबकि हाल के नामांतरण से ज़मीन किसी और के नाम हो चुकी हो। रियल टाइम यह पकड़ लेती है।

3विवाद की स्थिति (वाद ग्रस्त)

upbhulekh.gov.in पर “भूखंड/गाटे के वादग्रस्त होने की स्थिति जानें” खोलें, जनपद, तहसील, गांव और खसरा डालें और जाँचें। “वाद ग्रस्त” का मतलब है ज़मीन पर राजस्व अदालत में मुकदमा है: आपकी खरीद के बावजूद अदालत मालिकाना हक बदल सकती है, इसलिए पहले कानूनी सलाह लें। “वाद ग्रस्त नहीं” का मतलब है कोई चालू विवाद नहीं।

4विक्रय की स्थिति

upbhulekh.gov.in पर “भूखंड/गाटे के विक्रय की स्थिति जानें” खोलें, वही स्थान और खसरा डालें और जाँचें। इससे पता चलता है कि भूखंड बिक्री के लिए रजिस्टर्ड है या नहीं, और हाल में IGRSUP से कोई रजिस्ट्री हुई है या नहीं। अगर भूखंड पहले ही किसी और खरीदार के नाम रजिस्टर्ड है, तो विक्रेता दोहरी बिक्री की कोशिश कर रहा है।

5सीमा की जाँच (भू-नक्शा)

upbhunaksha.gov.in पर जनपद, तहसील और गांव चुनें, खसरा डालें और नक्शे पर भूखंड देखें। जाँचें कि विक्रेता ने ज़मीन पर जो सीमाएं दिखाईं, वे नक्शे से मेल खाती हैं। कब्ज़े के विवाद अक्सर इसी बेमेल से शुरू होते हैं।

पांचों जाँच मुफ्त हैं और कुल 10-15 मिनट लगते हैं। इनमें से एक भी छोड़ना लाखों रुपये का नुकसान करा सकता है।

भू-नक्शा — अलग पोर्टल पर ज़मीन का नक्शा

ज़मीन का नक्शा (भू-नक्शा) मुख्य भूलेख पोर्टल पर नहीं, अलग पोर्टल upbhunaksha.gov.in पर रखा जाता है। इसमें भूखंडों की सीमाएं, आकार, पड़ोसी भूखंड और हर भूखंड की भूमि का प्रकार दिखता है। इस पर पूरी जानकारी हमारी UP भू-नक्शा गाइड में है।

कैसे देखें: upbhunaksha.gov.in → जनपद → तहसील → RI सर्कल → गांव → गांव का नक्शा खुलता है → अपने भूखंड पर क्लिक करें या खसरा संख्या डालें → भूखंड अपने ब्योरे (मालिक का नाम, क्षेत्रफल, भूमि का प्रकार) के साथ हाइलाइट हो जाता है।

भूमि का प्रकार: भूखंड पर क्लिक करने पर साइडबार में उसका भूमि प्रकार UP की राजस्व श्रेणी के अंकों वाले कोड में दिखता है (जैसे 1-A, 2, 5-1 या 6-2)। ज़मीन क्या है, यह यही कोड बताता है, रंग नहीं। यही श्रेणी खतौनी पर भी छपी होती है, जैसे “1-क / भूमि जो संक्रमणीय भूमिधरों के अधिकार में हो”। हर कोड का मतलब जानने के लिए upbhulekh.gov.in के होमपेज पर “भूमि प्रकार की सूची” लिंक देखें। आम तौर पर दिखने वाले कोड:

कोड भूमि का प्रकार
1-A (1-क) भूमि जो संक्रमणीय भूमिधरों के अधिकार में हो (हस्तांतरणीय अधिकार वाले भूमिधरों की ज़मीन)
2 गैर-हस्तांतरणीय भूमिधारकों की भूमि (बिना हस्तांतरणीय अधिकार वाले भूमिधारकों की ज़मीन)
5-1 कृषि योग्य — नई परती (खेती लायक, हाल में परती छोड़ी गई)
5-3 अन्य कृषि भूमि लेकिन बंजर (अन्य कृषि भूमि, पर बंजर)
6-1 गैर-कृषि — जलमग्न भूमि (गैर-कृषि, पानी भरी या पानी के नीचे की ज़मीन)
6-2 सड़क, रेलवे, भवन आदि (सड़कें, रेलवे, इमारतें)

खरीदने से पहले जाँच लें कि भूखंड का भूमि प्रकार कोड विक्रेता के दावे से मेल खाता है: अगर विक्रेता “आवासीय” बताता है पर कोड कृषि भूमि (जैसे 1-A) दिखाता है, तो निर्माण से पहले भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति लेनी होगी।

डाउनलोड: “Map Report” पर क्लिक करें, या ब्राउज़र के प्रिंट फ़ंक्शन से भूखंड का नक्शा PDF में सेव करें। खतौनी की तरह यह मुफ्त नकल भी सिर्फ जानकारी के लिए है। कानूनी इस्तेमाल के लिए प्रमाणित नकल तहसील से मिलती है।

नामांतरण (दाखिल खारिज) — खरीदने या विरासत के बाद

जब ज़मीन बिक्री, विरासत, दान या बंटवारे से किसी और के पास जाती है, तो राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना ज़रूरी है। इसे नामांतरण या दाखिल खारिज (शाब्दिक अर्थ “दर्ज करना और हटाना”) कहते हैं। पूरी प्रक्रिया हमारी UP नामांतरण गाइड में देखें।

बिक्री के बाद: IGRSUP (igrsup.gov.in) पर संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी होते ही खरीदार को जितनी जल्दी हो सके नामांतरण का आवेदन करना चाहिए; आम तौर पर 30-45 दिन के भीतर आवेदन की सलाह दी जाती है। बिक्री या अन्य हस्तांतरण के बाद नामांतरण UP राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34-35 के तहत होता है, और आवेदन की कोई सख्त कानूनी समय सीमा नहीं है। आवेदन राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) vaad.up.nic.in के ज़रिए तहसीलदार के पास जाता है। 3 सितंबर 2026 को राजस्व परिषद ने धारा 34 के नामांतरण के लिए एक बीटा पोर्टल भी शुरू किया (साथ में ई-फाइलिंग और निचली अदालत के रिकॉर्ड भेजने के पोर्टल), इसलिए आवेदन का मौजूदा तरीका राजस्व परिषद या भूलेख की साइट पर देख लें। लेखपाल दस्तावेज़ जाँचता है, तहसीलदार आपत्तियां मांगने के लिए उद्घोषणा जारी करते हैं और फिर फैसला करते हैं (संहिता में सूचना की कोई तय अवधि नहीं है), और खतौनी में नया मालिक दर्ज हो जाता है। तहसीलदार के आदेश से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति धारा 35(2) के तहत 30 दिन के भीतर SDM के यहां अपील कर सकता है। देर से आवेदन करने से आपका मालिकाना हक रद्द नहीं होता, क्योंकि रजिस्ट्री ही बिक्री का कानूनी सबूत है, लेकिन देरी से दिक्कतें होती हैं: खतौनी पर पुराने मालिक का नाम बना रहता है, बैंक ज़मीन पर लोन देने में हिचकते हैं, निर्माण की अनुमतियां अटकती हैं, और जितनी देर करें, तीसरे पक्ष की आपत्तियां सुलझाना उतना मुश्किल होता है।

मृत्यु के बाद (वरासत): ज़मीन के मालिक की मृत्यु होने पर कानूनी वारिस वरासत (विरासत का नामांतरण) के लिए आवेदन करते हैं। इसके लिए ई-डिस्ट्रिक्ट का मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर नकल, तहसीलदार या अदालत का वारिस प्रमाण पत्र, और मौजूदा खतौनी चाहिए। UP राजस्व संहिता, 2006 की धारा 33 के तहत मृत्यु की सूचना दी जाती है, और लेखपाल के सत्यापन के बाद राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) निर्विवाद उत्तराधिकार खुद दर्ज करते हैं; सिर्फ विवादित मामला धारा 35 के तहत तहसीलदार के पास जाता है। इसके बाद खतौनी में वारिस का नाम दर्ज हो जाता है। दूसरे वारिस आपत्ति करें या नहीं, इसके हिसाब से वरासत में 2-6 महीने लग सकते हैं।

नामांतरण की स्थिति देखें: upbhulekh.gov.in पर नामांतरण वाला भाग खोलें और स्थान व मालिक या तारीख का ब्योरा डालें। या vaad.up.nic.in पर RCCMS केस की स्थिति खोलें और केस नंबर, नाम या खसरा डालें। स्थिति लंबित, मंज़ूर या नामंज़ूर के रूप में दिखती है।

vaad.up.nic.in पर राजस्व अदालत के वाद का सारांश, जिसमें वाद का ब्योरा, न्यायालय, अगली सुनवाई की तारीख और विवादित भूखंड की तालिका है। पक्षकारों के नाम धुंधले किए गए हैं।
vaad.up.nic.in पर राजस्व अदालत के वाद का सारांश: न्यायालय, वाद की प्रकृति, अगली सुनवाई की तारीख, और विवादित भूखंड का खाता, गाटा और यूनिक कोड। पक्षकारों के नाम धुंधले किए गए हैं।

“No Record Found” — 7 कारण और समाधान

भूलेख पर यह सबसे आम परेशानी है: आप सब कुछ सही भरते हैं, फिर भी “No Record Found” या खाली नतीजा आता है। इसके कारण और हर एक का समाधान यह है:

1गांव का नाम हिंदी में है

गांव हिंदी वर्णमाला के क्रम में हैं। अगर आप “Sarai” ढूंढ रहे हैं पर पोर्टल पर “सराय” या “सरायँ” लिखा है, तो “S” पर स्क्रॉल करने से नहीं मिलेगा। हिंदी के पहले अक्षर से ढूंढें। 2020-2024 में तहसीलों की सीमाएं बदलने से कुछ गांव दूसरी तहसील में चले गए, इसलिए पड़ोसी तहसील भी देखें।

2विवादित (वाद ग्रस्त) ज़मीन

विवादित भूखंड कभी-कभी सामान्य खतौनी में नहीं दिखते। रियल टाइम खतौनी पर जाएं और वाद ग्रस्त सूची देखें।

3नामांतरण लंबित है

नामांतरण की प्रक्रिया चलते समय पुराना रिकॉर्ड सामान्य दृश्य से छिप सकता है। रियल टाइम खतौनी बीच की स्थिति दिखाती है।

4पुराना रिकॉर्ड डिजिटल नहीं हुआ

कंप्यूटरीकरण (2016) के बाद के रिकॉर्ड पूरे हैं। कुछ गांवों के बहुत पुराने (2010 से पहले के) रिकॉर्ड अधूरे हो सकते हैं। भौतिक रजिस्टर के लिए तहसील कार्यालय से संपर्क करें।

5गलत खोज तरीका

डेटाबेस हिंदी में है, इसलिए नाम हिंदी में लिखें (Google Input Tools या फोन का हिंदी कीबोर्ड)। कुछ गांवों में कंप्यूटरीकरण के दौरान गाटा संख्याएं बदली गईं, इसलिए पुराना नंबर मेल नहीं खा सकता।

6सर्वर की समस्या

व्यस्त समय में और फसली वर्ष बदलने के आसपास पोर्टल धीमा हो जाता है। सुबह जल्दी (6-8 बजे) या देर शाम कोशिश करें। पूरा पोर्टल ही न खुले तो बाद में कोशिश करें।

7गलत पोर्टल

खसरा नकल (फसली/फसल रिकॉर्ड) ekhasra.up.gov.in पर है, भू-नक्शा upbhunaksha.gov.in पर, और राजस्व अदालत के मुकदमे vaad.up.nic.in पर। देख लें कि आप अपने काम के सही पोर्टल पर हैं।

भूलेख पर ग्राम चुनने का पेज, जिसमें हिंदी अक्षरों का ग्रिड (ग्राम का पहला अक्षर चुनें) और बगल में हिंदी में गांवों की सूची उनके कोड के साथ है
कारण 1: गांव हिंदी में सूचीबद्ध हैं। अक्षरों के ग्रिड (ग्राम का पहला अक्षर चुनें) से सीधे अपने गांव के पहले हिंदी अक्षर पर जाएं।

प्रमाणित नकल बनाम मुफ्त नकल — कानूनी अंतर

upbhulekh.gov.in से मिलने वाली मुफ्त खतौनी सिर्फ जानकारी वाली नकल है, जिस पर “अप्रमाणित प्रति” लिखा होता है। अलग-अलग प्रविष्टियों पर उन्हें दर्ज करने वाले रजिस्ट्रार कानूनगो के डिजिटल हस्ताक्षर दिख सकते हैं, पर इससे पूरी नकल प्रमाणित नहीं हो जाती। पोर्टल का अपना अस्वीकरण कहता है कि आंकड़े मात्र अवलोकनार्थ हैं। बैंक, अदालतें और उप-निबंधक कार्यालय कानूनी काम के लिए आम तौर पर प्रमाणित नकल मांगते हैं।

भूलेख खतौनी का निचला भाग, जिसमें रजिस्ट्रार कानूनगो के डिजिटल हस्ताक्षर की पंक्ति, पिछले आदेश और आंकड़े मात्र अवलोकनार्थ होने का अस्वीकरण है। अधिकारी का नाम धुंधला किया गया है।
मुफ्त खतौनी का निचला भाग: एक प्रविष्टि पर रजिस्ट्रार कानूनगो के डिजिटल हस्ताक्षर (नाम धुंधला किया गया है) और अस्वीकरण कि प्रमाणित प्रति तहसील कंप्यूटर केंद्र या CSC/लोकवाणी केंद्र से मिलती है।

प्रमाणित नकल कैसे लें:

  • ऑनलाइन: “भूलेख सेवाएं” में “ऑनलाइन पेमेंट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें” चुनें।
  • व्यक्तिगत रूप से: पोर्टल के अस्वीकरण के अनुसार प्रमाणित प्रति तहसील कंप्यूटर केंद्र और CSC/लोकवाणी केंद्रों से मिलती है। आधार और भूखंड का ब्योरा साथ ले जाएं।
  • रजिस्टर्ड लॉगिन: upbhulekh.gov.in पर रजिस्टर करना देखने से अलग है, और लॉगिन से तीन उन्नत सेवाएं मिलती हैं: प्रमाणित खतौनी डाउनलोड, नामांतरण आवेदन और शिकायत दर्ज करना। लॉगिन के बाद सिस्टम एक यूनीक सत्यापन कोड के साथ डिजिटल हस्ताक्षर वाली नकल बनाता है। “Login” मेन्यू में खतौनी, रियल टाइम खतौनी और खसरा पोर्टल के लॉगिन हैं।
भूलेख का Login मेन्यू खुला है, जिसमें खतौनी लॉगिन, रियल टाइम खतौनी लॉगिन और खसरा पोर्टल दिख रहे हैं
"Login" मेन्यू: खतौनी लॉगिन, रियल टाइम खतौनी लॉगिन और खसरा पोर्टल।

मुफ्त नकल कब काफी है: निजी संदर्भ, खरीद से पहले पड़ताल, मालिकाना हक की अनौपचारिक जाँच, अपने रिकॉर्ड की पुष्टि, या तहसील जाने की तैयारी। कानूनी कार्यवाही, पैसों के लेन-देन या सरकारी काम से जुड़ी किसी भी चीज़ के लिए प्रमाणित नकल लें।

UP के सभी भूमि पोर्टल — डायरेक्टरी

UP में भूमि रिकॉर्ड के अलग-अलग काम आठ अलग पोर्टल संभालते हैं। कौन सा पोर्टल क्या करता है, यह जानने से गलत साइट पर भटकना बचता है।

पोर्टल पता क्या करता है
UP Bhulekh upbhulekh.gov.in खतौनी, रियल टाइम खतौनी, यूनिक कोड, विक्रय/विवाद की स्थिति
भू-नक्शा upbhunaksha.gov.in भूखंड की सीमाओं वाला नक्शा
ई-खसरा ekhasra.up.gov.in खसरा नकल, फसली (मौसमी फसल) रिकॉर्ड
RCCMS / वाद vaad.up.nic.in राजस्व अदालत के मुकदमे, वरासत, नामांतरण, विवाद की स्थिति
अंश संशोधन upbhulekh.gov.in/ansh/ मौजूदा रिकॉर्ड में नाम या हिस्से का सुधार
IGRSUP igrsup.gov.in संपत्ति की रजिस्ट्री, स्टांप शुल्क, विवाह पंजीकरण
राजस्व परिषद bor.up.nic.in सभी राजस्व सेवाओं का केंद्र, मूल प्राधिकरण
जनसुनवाई (IGRS) jansunwai.up.nic.in UP के मुख्यमंत्री का सामान्य शिकायत पोर्टल; राजस्व अधिकारियों के खिलाफ शिकायत भी लेता है
upbhulekh.gov.in होमपेज का निचला भाग, जिसमें जनपद, तहसील, परगना, भूमि प्रकार की सूची, सरकारी भूमि खोज, शिकायत, स्टांप और रजिस्ट्री, राजस्व वाद, DILRMP और ई-डिस्ट्रिक्ट के लिंक और हेल्पलाइन 0522-2217144 है
upbhulekh.gov.in होमपेज के निचले भाग में संबंधित पोर्टलों (शिकायत, स्टांप और रजिस्ट्री, राजस्व वाद, DILRMP, ई-डिस्ट्रिक्ट) के लिंक और हेल्पलाइन 0522-2217144 दी गई है।

ई-खसरा (ekhasra.up.gov.in) को अक्सर भूलेख समझ लिया जाता है, पर इसका काम अलग है। भूलेख मालिकाना हक दिखाता है (ज़मीन किसकी है); ई-खसरा फसल का रिकॉर्ड दिखाता है: किस फसली मौसम में किस भूखंड पर कौन सी फसल बोई गई, सिंचाई की स्थिति (सिंचित या असिंचित), मिट्टी का प्रकार और खेती का इस्तेमाल। बैंक और कृषि विभाग फसल लोन के सत्यापन और किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदनों के लिए ई-खसरा देखते हैं।

अंश संशोधन (upbhulekh.gov.in/ansh/) सुधार का पोर्टल है। अगर खतौनी में आपके नाम की वर्तनी गलत है, पिता का नाम गलत है या आपका हिस्सा गलत दर्ज है, तो यहां सुधार का आवेदन करें। यह नामांतरण (मालिक बदलना) नहीं, बल्कि मौजूदा रिकॉर्ड में तथ्य का सुधार है। सहायक दस्तावेज़ों (आधार, मार्कशीट, सही ब्योरे वाले पुराने रिकॉर्ड) के साथ आवेदन करें; सुधार तहसीलदार के ज़रिए होता है।

लेखपाल — ये रिकॉर्ड कौन रखता है

भूलेख पर दिखने वाला हर भूमि रिकॉर्ड मूल रूप से एक ही अधिकारी ने बनाया था और वही आज भी रखता है: लेखपाल। राजस्व विभाग के तहत गांव स्तर पर तैनात लेखपाल वे भौतिक भूमि रजिस्टर रखता है जिन्हें पोर्टल डिजिटल करता है। नामांतरण मंज़ूर होने पर लेखपाल रिकॉर्ड अपडेट करता है। विवाद होने पर लेखपाल मौके की रिपोर्ट देता है। और जब आप ई-डिस्ट्रिक्ट UP पर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते हैं, तो यही लेखपाल आपके पते पर आकर आपकी आय, निवास या जाति का सत्यापन करता है।

UPSSSC पूरे उत्तर प्रदेश में 7,994 नए लेखपालों की भर्ती कर रहा है (विज्ञापन 02-परीक्षा/2025; मुख्य परीक्षा 21 मई 2026 को हुई, और मुख्य परीक्षा का परिणाम व दस्तावेज़ सत्यापन सितंबर 2026 में हुआ)। इस भर्ती की बड़ी वजह डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और ई-डिस्ट्रिक्ट प्रमाण पत्र सत्यापन का भारी काम है। आपकी स्क्रीन पर दिखने वाले डेटा और ज़मीन की असलियत के बीच लेखपाल ही इंसानी कड़ी है।

ई-डिस्ट्रिक्ट से संबंध — भूलेख रिकॉर्ड वाले प्रमाण पत्र

भूलेख और ई-डिस्ट्रिक्ट UP दो प्रमाण पत्रों की ज़रूरतों से जुड़े हैं।

हैसियत (सॉल्वेंसी) प्रमाण पत्र: ई-डिस्ट्रिक्ट के eSathi पोर्टल पर आवेदन होने वाला यह प्रमाण पत्र आपकी आर्थिक स्थिति साबित करता है। भूलेख की खतौनी इसका अनिवार्य सहायक दस्तावेज़ है, क्योंकि यह आपकी संपत्ति के ब्योरे में ज़मीन का मालिकाना हक साबित करती है।

वरासत के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र: ज़मीन के मालिक की मृत्यु होने पर भूलेख पर वरासत (विरासत का नामांतरण) की प्रक्रिया के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट का मृत्यु प्रमाण पत्र चाहिए। इसके बिना राजस्व विभाग कानूनी वारिसों के नाम ज़मीन दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू नहीं करता।

यह दोतरफा निर्भरता, जिसमें भूलेख के काम के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट के प्रमाण पत्र और ई-डिस्ट्रिक्ट के प्रमाण पत्र के लिए भूलेख के रिकॉर्ड चाहिए, दिखाती है कि UP की राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्थाएं कितनी गहराई से जुड़ी हैं।

त्वरित संदर्भ तालिका

विवरण जानकारी
आधिकारिक पोर्टल upbhulekh.gov.in
भू-नक्शा पोर्टल upbhunaksha.gov.in
ई-खसरा पोर्टल ekhasra.up.gov.in
राजस्व अदालत (RCCMS) vaad.up.nic.in
संचालक राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश
तकनीकी साझेदार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC)
शुरुआत 2 मई 2016
कार्यक्रम डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)
डिजिटल भूखंड 2 करोड़+
डिजिटल कृषि भूमि 95%+ (2025-26 तक)
रजिस्टर्ड यूज़र 2.6 करोड़ (2025)
ऑनलाइन खसरा डाउनलोड 12.5 करोड़ (2025)
दायरा सभी 75 जिले, 358 तहसीलें
खतौनी के प्रकार सामान्य (फसली चक्र) + रियल टाइम (लाइव अपडेट)
मुफ्त ऑनलाइन नकल सिर्फ जानकारी के लिए, प्रमाणित नहीं
प्रमाणित नकल पोर्टल पर ऑनलाइन भुगतान, तहसील कंप्यूटर केंद्र, या CSC/लोकवाणी केंद्र
नामांतरण आवेदन IGRSUP रजिस्ट्री के बाद 30-45 दिन में सलाह; कोई सख्त कानूनी समय सीमा नहीं (UP राजस्व संहिता 2006, धारा 34-35; वरासत धारा 33 में)
नामांतरण की सूचना और अपील आपत्तियां मांगने के लिए तहसीलदार की उद्घोषणा (संहिता में कोई तय अवधि नहीं); आदेश के 30 दिन के भीतर SDM के यहां अपील (धारा 35(2))
हेल्पलाइन 0522-2217144 (upbhulekh.gov.in फ़ुटर; कुछ साइटें 0522-2217145 बताती हैं)
शिकायत पोर्टल jansunwai.up.nic.in (IGRS, मुख्यमंत्री का सामान्य शिकायत पोर्टल)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UP Bhulekh क्या है?

UP Bhulekh (upbhulekh.gov.in) उत्तर प्रदेश का आधिकारिक डिजिटल भूमि रिकॉर्ड पोर्टल है, जिसे राजस्व परिषद NIC के साथ मिलकर चलाती है। 2 मई 2016 को DILRMP के तहत शुरू हुए इस पोर्टल पर 75 जिलों के 2 करोड़ से ज़्यादा भूखंड हैं। "भूलेख" का अर्थ है भूमि का रिकॉर्ड: भू (भूमि) + लेख (रिकॉर्ड)।

क्या UP Bhulekh मुफ्त है?

हां। खतौनी, खसरा, रियल टाइम रिकॉर्ड, विक्रय स्थिति और वाद ग्रस्त स्थिति देखना पूरी तरह मुफ्त है, और देखने के लिए लॉगिन की ज़रूरत नहीं। कानूनी इस्तेमाल के लिए प्रमाणित नकल पर पोर्टल या तहसील में मामूली शुल्क लग सकता है।

सामान्य खतौनी और रियल टाइम खतौनी में क्या अंतर है?

सामान्य खतौनी फसली वर्ष के चक्र (साल में एक बार) पर अपडेट होती है। रियल टाइम खतौनी नामांतरण मंज़ूर होते ही तुरंत अपडेट होती है। कानूनी काम के लिए तहसील से सामान्य खतौनी की प्रमाणित नकल लें। ताज़ा मालिकाना हक देखने के लिए रियल टाइम खतौनी देखें।

क्या ऑनलाइन खतौनी कानूनी रूप से मान्य है?

मुफ्त ऑनलाइन नकल सिर्फ जानकारी के लिए है, यानी निजी संदर्भ और शुरुआती जाँच के लिए। अदालत, बैंक, संपत्ति के लेन-देन या सरकारी काम के लिए प्रमाणित नकल (प्रमाण पत्र) चाहिए: इसे पोर्टल पर ऑनलाइन भुगतान करके मंगाएं, या तहसील कंप्यूटर केंद्र या CSC/लोकवाणी केंद्र से लें।

ज़मीन वाद ग्रस्त है या नहीं, कैसे जाँचें?

upbhulekh.gov.in पर "भूखंड/गाटे के वादग्रस्त होने की स्थिति जानें" खोलें, जिला, तहसील और गांव चुनें, खसरा संख्या डालें और खोजें। "वाद ग्रस्त" का मतलब है कि राजस्व अदालत में मुकदमा चल रहा है। "वाद ग्रस्त नहीं" का मतलब है कोई विवाद नहीं। पूरे मुकदमे का ब्योरा vaad.up.nic.in पर देखें।

मेरा रिकॉर्ड "No Record Found" दिखा रहा है। क्या करूं?

सात आम कारण हैं: गांव हिंदी में सूचीबद्ध है (अंग्रेज़ी में नहीं), विवादित ज़मीन अलग वाद ग्रस्त सूची में है, नामांतरण लंबित है, पुराना रिकॉर्ड डिजिटल नहीं हुआ, गलत खोज तरीका, सर्वर की समस्या, या गलत पोर्टल। पहले रियल टाइम खतौनी आज़माएं, नाम हिंदी में लिखें, और गांव की सीमा बदली हो तो पड़ोसी तहसील देखें। कुछ काम न करे तो तहसील कार्यालय जाएं।

नामांतरण / दाखिल खारिज क्या है?

बिक्री, विरासत, दान या बंटवारे के बाद भूमि रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना। UP राजस्व संहिता 2006 के तहत बिक्री/हस्तांतरण का नामांतरण धारा 34-35 में और विरासत (वरासत) का धारा 33 में होता है। IGRSUP पर रजिस्ट्री के बाद जितनी जल्दी हो सके तहसीलदार के यहां नामांतरण का आवेदन करें। तहसीलदार आपत्तियां मांगने के लिए उद्घोषणा जारी करते हैं और फिर फैसला करते हैं; उनके आदेश के खिलाफ धारा 35(2) के तहत 30 दिन के भीतर SDM के यहां अपील हो सकती है। कोई सख्त कानूनी समय सीमा नहीं है, लेकिन 30-45 दिन में आवेदन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि देरी से पुराना नाम खतौनी पर बना रहता है और लोन व अनुमतियां अटकती हैं। मृत्यु के बाद विरासत में मिली ज़मीन के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट के मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ वरासत का आवेदन करें।

वाद ग्रस्त का क्या मतलब है?

"वाद ग्रस्त" का मतलब है कि ज़मीन पर राजस्व अदालत में मुकदमा चल रहा है, जैसे सीमा, मालिकाना हक या विरासत का विवाद। वाद ग्रस्त ज़मीन खरीदना जोखिम भरा है, क्योंकि आपकी खरीद के बावजूद अदालत मालिकाना हक बदल सकती है। खरीदने से पहले हमेशा जाँचें।

ज़मीन का नक्शा कहां देखें?

upbhunaksha.gov.in पर, जो भूलेख से अलग पोर्टल है। जिला, तहसील और गांव चुनें, खसरा संख्या डालें और नक्शे पर भूखंड देखें। भूमि का प्रकार जानने के लिए भूखंड पर क्लिक करें और साइडबार में उसका कोड पढ़ें; नक्शे के रंगों पर भरोसा न करें, वे कोई तय मानक नहीं हैं।

भूलेख रिकॉर्ड कौन रखता है?

लेखपाल, जो राजस्व विभाग का गांव स्तर का अधिकारी है। यही अधिकारी ई-डिस्ट्रिक्ट के प्रमाण पत्र आवेदनों का सत्यापन भी करता है। UPSSSC पूरे UP में 7,994 नए लेखपालों की भर्ती कर रहा है (विज्ञापन 02-परीक्षा/2025; मुख्य परीक्षा 21 मई 2026 को हुई, और मुख्य परीक्षा का परिणाम व दस्तावेज़ सत्यापन सितंबर 2026 में)।

आधिकारिक वेबसाइट कौन सी है? क्या .com/.in वाली साइटें असली हैं?

एकमात्र आधिकारिक पोर्टल upbhulekh.gov.in है। upbhulekh.com, .net, .in या .org जैसी साइटें अनौपचारिक जानकारी वाली साइटें हैं, सरकारी पोर्टल नहीं। आधिकारिक जानकारी के लिए हमेशा देखें कि पता .gov.in पर खत्म होता हो।

भूलेख का ई-डिस्ट्रिक्ट से क्या संबंध है?

दो संबंध हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट पर हैसियत (सॉल्वेंसी) प्रमाण पत्र के लिए भूलेख की खतौनी सहायक प्रमाण के रूप में चाहिए, और भूलेख पर वरासत के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट का मृत्यु प्रमाण पत्र चाहिए। जो लेखपाल भूलेख रिकॉर्ड रखता है, वही ई-डिस्ट्रिक्ट के प्रमाण पत्र आवेदनों का सत्यापन भी करता है।