1जन्म दर्ज कराएं
सरकारी अस्पताल: MaNTrA-CRS के ज़रिए अपने-आप हो जाता है। घर पर जन्म: 21 दिन के भीतर ग्राम पंचायत (ग्रामीण) या नगर निकाय कार्यालय (शहरी) को सूचना दें।
2प्रमाण पत्र डाउनलोड करें
सरकारी अस्पताल → crsorgi.gov.in। शहरी नगर निकाय क्षेत्र → e-nagarsewaup.gov.in। पुराने रिकॉर्ड, कोई भी जिला → esathi.up.gov.in।
3दस्तावेज़
अस्पताल में जन्म: अस्पताल की जन्म रिपोर्ट या डिस्चार्ज समरी + माता-पिता का आधार। घर पर जन्म: ग्राम प्रधान या वार्ड पार्षद का प्रमाण पत्र, ANM/आशा की रिपोर्ट (अगर हो), माता-पिता का आधार।
4शुल्क और वैधता
21 दिन के भीतर मुफ्त। ई-साथी पर एक प्रति ₹10-15 (CSC पर ₹30+)। जीवन भर मान्य। ई-डिस्ट्रिक्ट हेल्पलाइन: 0522-2304706।
जन्म प्रमाण पत्र क्या है — और भारत अब 99% जन्म क्यों दर्ज करता है
जन्म प्रमाण पत्र बच्चे के जन्म की तारीख, समय और स्थान, और माता-पिता का सरकारी रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति को मिलने वाला पहला कानूनी दस्तावेज़ है, और आगे का लगभग हर पहचान दस्तावेज़ इसी से जुड़ता है: आधार, स्कूल में दाखिला, पासपोर्ट, परीक्षाओं के लिए आयु प्रमाण, विवाह पंजीकरण और उत्तराधिकार के दावे।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (RBD Act) हर जन्म का पंजीकरण अनिवार्य बनाता है। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जुलाई 2026 में जारी नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 में 2.55 करोड़ जन्म दर्ज हुए, यानी 99.1% पंजीकरण स्तर, जो 2000 में सिर्फ 56% था, और 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पूरा पंजीकरण हासिल किया।
NFHS-5 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 83.4% जन्म संस्थागत होते हैं (अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में), और अस्पताल में होने वाले जन्मों के लिए राज्य एक कदम आगे गया है: यह सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों में जन्म अपने-आप दर्ज करने वाला पहला राज्य बना, इसलिए कई परिवारों को किसी दफ्तर गए बिना प्रमाण पत्र तैयार मिलता है (यह कैसे काम करता है, नीचे “MaNTrA-CRS ऑटोमेशन” वाले भाग में देखें)।
फिर भी UP की एक खास समस्या है: UP के CRS आर्किटेक्चर डेटा के अनुसार, राज्य में 29% जन्म पंजीकरण 1 साल से ज़्यादा देर से होते हैं, यानी लगभग हर 3 में से 1 जन्म के लिए मजिस्ट्रेट वाला रास्ता। वजहें हर बार एक जैसी हैं: ग्रामीण इलाकों में घर पर हुए जन्म, जहां परिवारों को 21 दिन के नियम का पता नहीं होता; ऐसे जन्म जिनमें बच्चे का नाम तुरंत तय नहीं होता (माता-पिता गलती से मानते हैं कि बिना नाम के पंजीकरण नहीं हो सकता); और पंजीकरण कार्यालयों से दूर के इलाके।
कौन सा पोर्टल इस्तेमाल करें — वह फैसला जिसमें सब उलझते हैं
UP में जन्म प्रमाण पत्र तीन पोर्टल संभालते हैं, और हर एक में अलग रिकॉर्ड हैं। गलत पोर्टल पर खोजें तो लगेगा कि आपका प्रमाण पत्र है ही नहीं, जबकि वह मौजूद होता है।
| आपकी स्थिति | पोर्टल | पता |
|---|---|---|
| सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में हाल का जन्म | CRS पोर्टल | crsorgi.gov.in |
| नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत क्षेत्र में जन्म | ई-नगरसेवा | e-nagarsewaup.gov.in |
| पुराने रिकॉर्ड, CRS पर न मिलने वाले ग्रामीण जन्म, 75 में से कोई भी जिला | ई-साथी (ई-डिस्ट्रिक्ट) | esathi.up.gov.in |
| किसी पोर्टल पर नहीं मिला | रजिस्ट्रार का दफ्तर (ग्राम पंचायत / नगर निकाय कार्यालय) या तहसील | – |
- CRS (crsorgi.gov.in): राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण प्रणाली। UP की सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों में होने वाले जन्म MaNTrA लिंक के ज़रिए यहां अपने-आप दर्ज होते हैं, अक्सर परिवार के कोई आवेदन करने से पहले ही।
- ई-नगरसेवा (e-nagarsewaup.gov.in): UP के शहरी स्थानीय निकायों का पोर्टल, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में होने वाले जन्मों के लिए, जैसे लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और आगरा।
- ई-साथी (esathi.up.gov.in): ई-डिस्ट्रिक्ट UP पोर्टल, सभी 75 जिलों के पुराने रिकॉर्ड, CRS पर न मिलने वाले ग्रामीण जन्म, और बाकी दोनों पर न मिलने वाली हर चीज़ के लिए। प्रमाण पत्र (₹10-15) के लिए आवेदन यहीं करें।
एक पोर्टल की ओर बदलाव: 2020 में राज्य ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को एक ही CRS पोर्टल (crsorgi.gov.in) पर लाने का फ़ैसला किया, जैसा उस समय पत्रिका ने बताया था। ग्राम पंचायत सचिवों को रजिस्ट्रार के रूप में प्रशिक्षण और CRS लॉग इन दिए गए, और नगर निकाय भी CRS पर रजिस्ट्रार के रूप में काम करते हैं। ई-साथी और ई-नगरसेवा पर जन्म और मृत्यु वाले रास्ते अब भी कुछ जिलों और नगर निकायों के पेजों पर दिखते हैं, इसलिए अगर इनमें से कोई काम न करे, तो अपने ग्राम पंचायत सचिव या नगर निकाय कार्यालय से CRS वाला रास्ता पूछें।
अगर तीनों में से किसी पर नहीं है: हो सकता है जन्म कभी दर्ज ही न हुआ हो, या रिकॉर्ड ऐसे कागज़ी रजिस्टरों में हो जो अभी डिजिटल नहीं हुए। जन्म का जो भी प्रमाण आपके पास हो, उसे लेकर रजिस्ट्रार के दफ्तर या तहसील जाएं: अस्पताल के कागज़, टीकाकरण (MCH) कार्ड या स्कूल रिकॉर्ड।
21 दिन का नियम — पंजीकरण की समय-सीमा
121 दिन के भीतर: मुफ्त
स्थानीय रजिस्ट्रार को जन्म की सूचना दें। अस्पताल खुद सूचना देते हैं (UP की सरकारी इकाइयों में अपने-आप); घर पर जन्म हो तो परिवार सूचना देता है। पंजीकरण के बाद प्रमाण पत्र 7 दिन के भीतर जारी होना चाहिए (RBD संशोधन 2023)। पहली प्रति मुफ्त है।
221 से 30 दिन: विलंब शुल्क
वही दस्तावेज़, साथ में ₹2-50 का मामूली विलंब शुल्क (मूल नियमों के तहत: 30 दिन तक ₹2, एक साल तक ₹5, एक साल के बाद ₹10; UP की मौजूदा दर जाँच लें)।
330 दिन से 1 साल: अनुमति
जिला रजिस्ट्रार (या अधिकृत अधिकारी) की लिखित अनुमति, विलंब शुल्क, और देरी का स्व-प्रमाणित कारण।
41 साल के बाद: मजिस्ट्रेट का आदेश
जिलाधिकारी, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश। UP में 29% जन्म पंजीकरण इसी श्रेणी में आते हैं। 2023 के संशोधन ने इसे न्यायिक से कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास कर दिया, जिससे यह आसान हुआ, हालांकि अब भी औपचारिक आवेदन ज़रूरी है।
जन्म के देर से पंजीकरण की जाँच
जन्म की तारीख भरें और देखें कि पंजीकरण में कितनी देरी है और क्या चाहिए।
- बीते दिन
- मुफ्त 21 दिन की अवधि
- आपकी श्रेणी
स्थानीय रजिस्ट्रार को जन्म की सूचना दें। अस्पताल खुद सूचना देते हैं (UP की सरकारी इकाइयों में अपने-आप); घर पर जन्म हो तो परिवार सूचना देता है। पंजीकरण के बाद प्रमाण पत्र 7 दिन के भीतर जारी होना चाहिए (RBD संशोधन 2023)। पहली प्रति मुफ्त है।
किसके पास जाएं
स्थानीय रजिस्ट्रार: ग्राम पंचायत (ग्रामीण) या नगर निकाय कार्यालय (शहरी)।
दस्तावेज़
अस्पताल में जन्म: अस्पताल की जन्म रिपोर्ट या डिस्चार्ज समरी + माता-पिता दोनों का आधार। घर पर जन्म: ग्राम प्रधान या वार्ड पार्षद का प्रमाण पत्र, ANM/आशा की रिपोर्ट (अगर हो), माता-पिता दोनों का आधार और दो गवाहों के बयान।
नाम अभी तय नहीं हुआ? बिना नाम के अभी जन्म दर्ज कराएं और नाम बाद में रजिस्ट्रार के दफ्तर में जुड़वाएं: 12 महीने के भीतर मुफ्त।
वही दस्तावेज़, साथ में ₹2-50 का मामूली विलंब शुल्क (मूल नियमों के तहत: 30 दिन तक ₹2, एक साल तक ₹5, एक साल के बाद ₹10; UP की मौजूदा दर जाँच लें)।
किसके पास जाएं
स्थानीय रजिस्ट्रार: ग्राम पंचायत (ग्रामीण) या नगर निकाय कार्यालय (शहरी)।
दस्तावेज़
21 दिन वाले ही दस्तावेज़, साथ में विलंब शुल्क।
जिला रजिस्ट्रार (या अधिकृत अधिकारी) की लिखित अनुमति, विलंब शुल्क, और देरी का स्व-प्रमाणित कारण।
किसके पास जाएं
लिखित अनुमति के लिए जिला रजिस्ट्रार (या अधिकृत अधिकारी)।
दस्तावेज़
जन्म के दस्तावेज़, देरी का स्व-प्रमाणित कारण और विलंब शुल्क।
जिलाधिकारी, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश। 2023 के संशोधन ने इसे न्यायिक से कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास कर दिया, जिससे यह आसान हुआ, हालांकि अब भी औपचारिक आवेदन ज़रूरी है। UP में 29% जन्म पंजीकरण इसी श्रेणी में आते हैं।
किसके पास जाएं
जिलाधिकारी, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट।
दस्तावेज़
आपके पास मौजूद हर प्रमाण: अस्पताल के पुराने कागज़, MCH टीकाकरण कार्ड, बच्चे का आधार (अगर हो), स्कूल रिकॉर्ड, आशा के रिकॉर्ड और पड़ोसियों के बयान। आवेदन तैयार करने में कोई वकील मदद कर सकता है।
संसद से पारित 2026 के संशोधन के तहत एक से दो साल की देरी जिलाधिकारी, SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास ही रहेगी।
दो साल से ज़्यादा देरी: संसद ने अगस्त 2026 में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। इसके लागू होने पर, दो साल से ज़्यादा देर से जन्म दर्ज कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए होगा, जो 2023 के बदलाव को आंशिक रूप से पलटता है। आवेदन करते समय जाँच लें कि नया नियम लागू हुआ है या नहीं।
यह इस पेज पर दी गई श्रेणियों पर आधारित एक मार्गदर्शन है, कानूनी सलाह नहीं। शुल्क और नियम बदल सकते हैं: अपने रजिस्ट्रार से या crsorgi.gov.in पर पुष्टि करें।
ज़रूरी दस्तावेज़ — अस्पताल बनाम घर पर जन्म
अस्पताल / संस्थागत जन्म
- अस्पताल की जन्म रिपोर्ट: अस्पताल को 21 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को जन्म की रिपोर्ट देनी होती है। UP की सरकारी इकाइयों में यह MaNTrA-CRS के ज़रिए अपने-आप होता है; निजी अस्पताल अब भी इसे हाथ से भेज सकते हैं। अस्पताल छोड़ने से पहले डिस्चार्ज समरी या जन्म रिपोर्ट मांग लें, जिसमें तारीख, समय, स्थान, माता-पिता के नाम और इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम हो।
- माता-पिता दोनों का आधार।
- माता-पिता का विवाह प्रमाण पत्र: सलाह दी जाती है और मददगार है, हालांकि हमेशा ज़रूरी नहीं।
घर पर जन्म
- ग्राम प्रधान (ग्रामीण) या वार्ड पार्षद (शहरी) का प्रमाण पत्र, जो घर पर जन्म की पुष्टि करे, तारीख, माता-पिता के नाम और पते के साथ, लेटरहेड पर हस्ताक्षर और मुहर सहित।
- ANM या आशा की रिपोर्ट, अगर उपलब्ध हो: अगर किसी सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) या आशा कार्यकर्ता ने जन्म में मदद की थी या उसे जन्म की जानकारी दी गई थी, तो उसकी रिपोर्ट सहायक प्रमाण है। (RBD Act की धारा 8 में 2023 के संशोधन ने सूचना देने वालों की सूची बढ़ाकर उसमें दत्तक माता-पिता, एकल या अविवाहित माताओं, सरोगेसी से बने माता-पिता, दत्तक ग्रहण एजेंसियों और बाल देखरेख संस्थानों को शामिल किया।)
- माता-पिता दोनों का आधार।
- दो गवाहों के बयान, जिन्हें जन्म की जानकारी हो, उनके नाम, आधार, पते और परिवार से रिश्ते के साथ।
ई-साथी पर आवेदन कैसे करें — नया या डुप्लिकेट प्रमाण पत्र
जो जन्म CRS या ई-नगरसेवा पर नहीं हैं, या पुराने रिकॉर्ड की प्रतियों के लिए, ई-डिस्ट्रिक्ट के ई-साथी पोर्टल पर आवेदन करें।
-
ई-साथी पर लॉग इन करें
esathi.up.gov.in पर लॉग इन करें।
-
विभाग चुनें
“आवेदन भरें” पर क्लिक करें। शहरी जन्म के लिए जन्म प्रमाण पत्र “नगर विकास विभाग” में और ग्रामीण जन्म के लिए “पंचायती राज विभाग” में मिलता है।
-
बच्चे का विवरण भरें
नाम (या “नाम तय नहीं”), जन्म की तारीख और समय, स्थान (अस्पताल या घर का पता), लिंग, और माता-पिता दोनों के नाम और आधार नंबर।
-
आवेदक का विवरण भरें
माता या पिता का नाम, रिश्ता, आधार और मोबाइल नंबर।
-
आधार OTP से सत्यापन करें
आधार OTP जाँच पूरी करें (अनिवार्य)।
-
दस्तावेज़ अपलोड करें
अस्पताल की जन्म रिपोर्ट या ग्राम प्रधान का प्रमाण पत्र, माता-पिता दोनों का आधार, स्व-घोषणा पत्र (हस्ताक्षरित, JPEG, 100KB से कम) और एक फोटो।
-
शुल्क भरें
PAYGOV के ज़रिए ₹10-15। पंजीकरण के समय पहली प्रति मुफ्त है; ई-साथी का शुल्क पहले से दर्ज जन्मों की प्रतियों और ऑनलाइन प्रोसेस होने वाले रिकॉर्ड के लिए है।
-
जमा करें और अपना SRN सहेजें
आवेदन जमा करें और अपना सर्विस रिक्वेस्ट नंबर (SRN) नोट कर लें। इसे ई-डिस्ट्रिक्ट होमपेज के “आवेदन की स्थिति कैसे देखें” वाले भाग में बताए तरीके से ट्रैक करें।
जन्म प्रमाण पत्र कहां चाहिए — इससे शुरू होने वाली कड़ी
जन्म प्रमाण पत्र एक बार काम आने वाला दस्तावेज़ नहीं है: यह पहचान और पात्रता के दस्तावेज़ों की एक ऐसी कड़ी शुरू करता है जो जीवन भर चलती है।
- बाल आधार (0-5 साल): 5 साल से कम उम्र के बच्चों का नीला आधार कार्ड जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर बनता है (UIDAI अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप भी स्वीकार करता है) और माता या पिता के आधार से जुड़ा होता है; बच्चे का बायोमेट्रिक नहीं लिया जाता।
- RTE के तहत स्कूल में दाखिला (5-6 साल): RTE अधिनियम की धारा 14 के तहत दाखिले के लिए बच्चे की उम्र जन्म प्रमाण पत्र (या राज्य द्वारा तय किसी दूसरे दस्तावेज़) से तय होती है, और 1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद जन्मे बच्चों के लिए 2023 का संशोधन जन्म प्रमाण पत्र को स्कूल दाखिले में जन्म तिथि साबित करने का एकमात्र दस्तावेज़ बनाता है। यही धारा कहती है कि आयु प्रमाण न होने भर से किसी बच्चे को दाखिले से मना नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रमाण पत्र के बिना परिवारों को देरी झेलनी पड़ती है, और इसी समय कई परिवारों को पता चलता है कि जन्म कभी दर्ज ही नहीं हुआ था, 3-5 साल बाद, जब तक मजिस्ट्रेट का आदेश ज़रूरी हो चुका होता है।
- 10वीं बोर्ड पंजीकरण: बोर्ड रिकॉर्ड में जन्म तिथि स्कूल दाखिले के समय दिए गए दस्तावेज़ों से आती है। जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल रिकॉर्ड में अंतर कॉलेज, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों तक छात्र का पीछा करता है।
- पासपोर्ट: 1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद जन्मे किसी भी व्यक्ति के लिए जन्म प्रमाण पत्र जन्म तिथि का एकमात्र मान्य प्रमाण है (पासपोर्ट (संशोधन) नियम 2025)। उससे पहले जन्मे लोग अब भी दूसरे दस्तावेज़ इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, PAN कार्ड या वोटर ID।
- सरकारी परीक्षाओं के लिए आयु प्रमाण: UPSC, UPPSC, SSC, UPSSSC (लेखपाल) और UP पुलिस 10वीं की मार्कशीट को आयु प्रमाण मानते हैं, और वह तारीख जन्म रिकॉर्ड से आती है। अगर दोनों मेल न खाएं, तो दस्तावेज़ सत्यापन में सवालों के लिए तैयार रहें।
- UP स्कॉलरशिप: सक्षम पोर्टल पर अपलोड नहीं होता, लेकिन छात्रवृत्ति रिकॉर्ड की जन्म तिथि जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट और आधार से मेल खानी चाहिए। कहीं भी अंतर होने पर “Data Mismatch” त्रुटि आती है।
- विवाह पंजीकरण: जन्म प्रमाण पत्र कानूनी न्यूनतम आयु (महिलाओं के लिए 18, पुरुषों के लिए 21) का प्रमाण है।
- उत्तराधिकार और संपत्ति: विवादित उत्तराधिकार में जन्म प्रमाण पत्र माता-पिता का संबंध स्थापित करता है, जिससे साबित होता है कि कानूनी वारिस कौन है, जब भूलेख पर वरासत पर विवाद हो।
MaNTrA-CRS ऑटोमेशन — UP के अस्पतालों में जन्म अपने-आप कैसे दर्ज होते हैं
इस व्यवस्था-स्तर के बदलाव के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, अस्पताल के कर्मचारी भी नहीं। उत्तर प्रदेश सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वतः (suo motu) जन्म पंजीकरण शुरू करने वाला पहला राज्य था। इसे लखनऊ के जनगणना कार्य निदेशालय ने NHM-UP, UNICEF और भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय के साथ मिलकर बनाया।
-
अस्पताल MaNTrA में जन्म दर्ज करता है
कर्मचारी जन्म को MaNTrA (मां नवजात ट्रैकिंग ऐप) में दर्ज करते हैं, जो NHM-UP का मां और नवजात की ट्रैकिंग का ऐप है।
-
CRS विवरण ले लेता है
नागरिक पंजीकरण प्रणाली का API MaNTrA से जन्म के बारे में 17 फील्ड ले लेता है।
-
प्रमाण पत्र बनता है और उस पर हस्ताक्षर होते हैं
CRS पंजीकरण प्रोसेस करता है, एक जन्म पंजीकरण संख्या (BRN) बनाता है जो वापस MaNTrA को भेजी जाती है, और उसी डेटा से जन्म प्रमाण पत्र तैयार करता है; अस्पताल का रजिस्ट्रार उस पर डिजिटल हस्ताक्षर करता है।
-
परिवार इसे डाउनलोड करता है
प्रमाण पत्र crsorgi.gov.in पर सत्यापित और डाउनलोड किया जा सकता है, अक्सर परिवार के किसी सरकारी दफ्तर जाने से पहले ही।
यह सेवा लगभग 1,000 सरकारी इकाइयों से शुरू हुई और समय के साथ बढ़ाई गई है। अगर आपके बच्चे का जन्म UP के किसी सरकारी अस्पताल में हुआ है, तो पहले crsorgi.gov.in जाँचें। निजी अस्पतालों पर यह ऑटोमेशन ज़रूरी नहीं कि लागू हो: कई अब भी रजिस्ट्रार को जन्म रिपोर्ट हाथ से भेजते हैं, इसलिए अस्पताल से पूछें कि वह जन्म की रिपोर्ट कैसे करता है।
नाम जोड़ना या सुधारना
एक आम मामला: जन्म 21 दिन के भीतर, सही तरीके से दर्ज हुआ, लेकिन नाम तय नहीं था, इसलिए प्रमाण पत्र पर कोई नाम नहीं है।
- 12 महीने के भीतर: जिस रजिस्ट्रार के दफ्तर में जन्म दर्ज हुआ था (ग्राम पंचायत या नगर निकाय कार्यालय), वहां बच्चे के नाम, माता-पिता के आधार और पंजीकरण रसीद के साथ आवेदन करें। रजिस्ट्रार नाम जोड़कर संशोधित प्रमाण पत्र मुफ्त जारी करता है।
- 12 महीने के बाद: नाम अब भी जोड़ा जा सकता है, थोड़े विलंब शुल्क के साथ (नियम 15 साल तक इसकी अनुमति देते हैं)। रजिस्ट्रार सहायक दस्तावेज़ मांग सकता है, जैसे नाम दिखाने वाला स्कूल दाखिले का रिकॉर्ड या आधार, और इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
- गलत प्रविष्टि सुधारना अलग है: गलत नाम, वर्तनी या माता-पिता का नाम हो तो मौजूदा प्रविष्टि में संशोधन करना होता है, खाली जगह भरना नहीं। सही विवरण के प्रमाण के साथ रजिस्ट्रार (या जिला रजिस्ट्रार) के पास आवेदन करें: आधार, स्कूल रिकॉर्ड, माता-पिता के पहचान पत्र।
अस्वीकृति और देरी की आम वजहें — 6 समस्याएं और उनके हल
1अस्पताल ने जन्म की रिपोर्ट नहीं दी
कुछ निजी अस्पताल 21 दिन के भीतर जन्म की रिपोर्ट नहीं देते, और परिवार को तभी पता चलता है जब कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता। अस्पताल से लिखित में रिपोर्ट भेजने को कहें। अगर वह मना करे या बंद हो चुका हो, तो डिस्चार्ज समरी के साथ खुद रजिस्ट्रार को जन्म की सूचना दें, और अगर अस्पताल कागज़ न दे तो जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से शिकायत करें।
221 दिन की अवधि निकल गई
ग्रामीण UP में घर पर हुए जन्मों में आम है। सही श्रेणी के तहत आवेदन करें: विलंब शुल्क (21-30 दिन), अनुमति (30 दिन से 1 साल) या मजिस्ट्रेट का आदेश (1 साल से ज़्यादा)।
3माता-पिता के नाम मेल नहीं खाते
मां का नाम पंजीकरण, आधार और विवाह प्रमाण पत्र में अलग-अलग है। हर जगह आधार पर लिखे हूबहू नाम इस्तेमाल करें।
4स्व-घोषणा पत्र की गड़बड़ी
हर ई-डिस्ट्रिक्ट प्रमाण पत्र की तरह, स्व-घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर होने चाहिए और इसे 100KB से कम की JPEG के रूप में अपलोड करना होता है, PDF नहीं।
5गलत पोर्टल पर खोजा
प्रमाण पत्र CRS पर है पर आपने ई-साथी पर खोजा, या ई-नगरसेवा पर है पर आपने CRS पर खोजा। यह मानने से पहले कि जन्म कभी दर्ज नहीं हुआ, तीनों पर देख लें।
6कभी दर्ज नहीं हुआ; बच्चा अब 5 साल या उससे बड़ा
स्कूल दाखिले के समय यह सामने आता है। हर प्रमाण इकट्ठा करें: अस्पताल के पुराने कागज़, MCH टीकाकरण कार्ड, बच्चे का आधार (अगर हो), स्कूल रिकॉर्ड, आशा के रिकॉर्ड और पड़ोसियों के बयान, और मजिस्ट्रेट के आदेश के साथ विलंबित पंजीकरण के लिए आवेदन करें (आवेदन तैयार करने में कोई वकील मदद कर सकता है)।
त्वरित संदर्भ
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रमाण पत्र का नाम | जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) |
| कानून | RBD Act, 1969 (2023 में संशोधित; 2026 का संशोधन संसद से पारित) |
| जारी करने वाला | जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार (नगर निकाय / ग्राम पंचायत / अस्पताल का रजिस्ट्रार) |
| CRS पोर्टल | crsorgi.gov.in |
| ई-नगरसेवा पोर्टल | e-nagarsewaup.gov.in |
| ई-साथी पोर्टल | esathi.up.gov.in |
| पंजीकरण की समय-सीमा | 21 दिन (मुफ्त) |
| 1 साल के बाद | मजिस्ट्रेट का आदेश (2 साल से ज़्यादा: 2026 का संशोधन लागू होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट) |
| ई-साथी शुल्क | ₹10-15 |
| CSC शुल्क | ₹30 + सुविधा शुल्क |
| पंजीकरण के समय पहली प्रति | मुफ्त |
| प्रमाण पत्र जारी होना | पंजीकरण के 7 दिन के भीतर (RBD संशोधन 2023) |
| नाम जोड़ना | 12 महीने के भीतर मुफ्त; बाद में विलंब शुल्क के साथ |
| वैधता | जीवन भर |
| भारत, 2024 | 2.55 करोड़ जन्म दर्ज, 99.1% (CRS रिपोर्ट 2024) |
| UP के सरकारी अस्पताल | MaNTrA-CRS के ज़रिए अपने-आप पंजीकरण |
| पासपोर्ट | 1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद जन्मे लोगों के लिए जन्म तिथि का एकमात्र प्रमाण |
| UP में संस्थागत जन्म | 83.4% (NFHS-5) |
| UP में 1 साल से ज़्यादा देर से पंजीकरण | 29% (UP का CRS आर्किटेक्चर डेटा) |
| ई-डिस्ट्रिक्ट हेल्पलाइन | 0522-2304706 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UP में जन्म प्रमाण पत्र क्या है?
एक सरकारी दस्तावेज़ जिसमें जन्म की तारीख, समय, स्थान और माता-पिता दर्ज होते हैं। इसे जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार, जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम (RBD Act), 1969 (2023 में संशोधित) के तहत जारी करता है। UP में तीन पोर्टल काम आते हैं: CRS (crsorgi.gov.in), शहरी स्थानीय निकायों के लिए ई-नगरसेवा, और पुराने रिकॉर्ड के लिए ई-साथी। 2020 से UP जन्म और मृत्यु पंजीकरण को एक ही CRS पोर्टल पर ला रहा है, जहां ग्राम पंचायत सचिव और नगर निकाय रजिस्ट्रार के रूप में काम करते हैं। भारत में 2024 में 2.55 करोड़ जन्म दर्ज हुए, यानी 99.1% पंजीकरण स्तर।
मुझे कौन सा पोर्टल इस्तेमाल करना चाहिए?
सरकारी अस्पताल में हाल का जन्म: crsorgi.gov.in। नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत क्षेत्र में जन्म: e-nagarsewaup.gov.in। पुराने रिकॉर्ड या CRS पर न मिलने वाले ग्रामीण जन्म: esathi.up.gov.in। अगर किसी पर न मिले, तो रजिस्ट्रार के दफ्तर (ग्राम पंचायत या नगर निकाय कार्यालय) या तहसील जाएं। UP 2020 से पंजीकरण को CRS पर ला रहा है, इसलिए अगर ई-साथी या ई-नगरसेवा वाला रास्ता काम न करे, तो अपने ग्राम पंचायत सचिव या नगर निकाय कार्यालय से CRS वाला रास्ता पूछें।
क्या बच्चे का नाम तय करने से पहले जन्म दर्ज करा सकते हैं?
हां। 21 दिन के भीतर बिना नाम के भी जन्म दर्ज हो सकता है। तुरंत पंजीकरण कराएं और नाम बाद में रजिस्ट्रार के दफ्तर में जुड़वाएं: 12 महीने के भीतर मुफ्त, उसके बाद थोड़े विलंब शुल्क के साथ (नियम 15 साल तक इसकी अनुमति देते हैं)। नाम तय न होने की वजह से पंजीकरण में कभी देर न करें।
जन्म का पंजीकरण कितने दिन में कराना होता है?
21 दिन के भीतर, मुफ्त। 21 दिन के बाद मामूली विलंब शुल्क (₹2-50) लगता है, और 30 दिन से एक साल तक जिला रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति भी चाहिए। एक साल के बाद मजिस्ट्रेट का आदेश ज़रूरी है; UP में 29% पंजीकरण एक साल से ज़्यादा देर से होते हैं। संसद से पारित 2026 के संशोधन के लागू होने पर, दो साल से ज़्यादा की देरी के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए होगा।
मेरे बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में हुआ। क्या जन्म पहले से दर्ज है?
बहुत संभव है। UP की सरकारी स्वास्थ्य इकाइयां जन्म अपने-आप दर्ज करती हैं: CRS पोर्टल MaNTrA नवजात ट्रैकिंग ऐप से विवरण ले लेता है, और अस्पताल का रजिस्ट्रार प्रमाण पत्र पर डिजिटल हस्ताक्षर करता है। crsorgi.gov.in पर जाँचें। निजी अस्पताल में जन्म हुआ हो तो पूछें कि उन्होंने रजिस्ट्रार को जन्म की रिपोर्ट भेजी है या नहीं।
बाल आधार क्या है?
5 साल से कम उम्र के बच्चों का नीला आधार कार्ड। यह जन्म प्रमाण पत्र (या अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप) के आधार पर बनता है और माता या पिता के आधार से जुड़ा होता है; बच्चे का बायोमेट्रिक नहीं लिया जाता। इस नामांकन के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही सामान्य दस्तावेज़ है।
क्या पासपोर्ट के लिए जन्म प्रमाण पत्र ज़रूरी है?
1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद जन्मे किसी भी व्यक्ति के लिए, हां: पासपोर्ट (संशोधन) नियम 2025 के तहत जन्म तिथि का एकमात्र मान्य प्रमाण जन्म प्रमाण पत्र है। उससे पहले जन्मे लोग अब भी दूसरे दस्तावेज़ इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, PAN कार्ड या वोटर ID।
प्रमाण पत्र में नाम या माता-पिता का विवरण गलत है। इसे कैसे ठीक कराएं?
जिस रजिस्ट्रार ने जन्म दर्ज किया था (या जिला रजिस्ट्रार) के पास सही विवरण के प्रमाण के साथ आवेदन करें: आधार, स्कूल रिकॉर्ड, विवाह प्रमाण पत्र। पहले से दर्ज प्रविष्टि सुधारना, खाली प्रविष्टि में नाम जोड़ने से अलग प्रक्रिया है।
जन्म प्रमाण पत्र कितने समय तक मान्य रहता है?
जीवन भर। इसकी वैधता कभी खत्म नहीं होती और इसे नवीनीकरण की ज़रूरत नहीं।
जन्म प्रमाण पत्र का ई-डिस्ट्रिक्ट से क्या संबंध है?
पुराने जन्म रिकॉर्ड के लिए सभी 75 जिलों में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल ई-साथी पर आवेदन किया जा सकता है। प्रमाण पत्र की जन्म तिथि स्कूल रिकॉर्ड, 10वीं की मार्कशीट और आधार में भी जाती है, जिनका इस्तेमाल फिर ई-डिस्ट्रिक्ट पर आय, जाति और निवास के आवेदनों में होता है।